1 मई 2015

जीवन मुझको नया मिला...!




आज लिखा जीवन के पट पर
यारों मैंने गीत नया
नई सुगन्ध है, नई किरण है
जीवन मुझको नया मिला..

अब न रुकुँगी जीवन-पथ पर
प्रण मैंने है आज किया
जितने कंटक और शूल थे
आज सभी को पार किया..

आँखों में अब नहीं याचना
न ही अश्रु की है धारा
साँसों में है नई ताज़गी
शब्दों में जीवन-धारा..

साथ चलेगा जग मेरे अब
मैं सबको दिखलाउँगी
पथ-प्रशस्त कर इस जग का मैं
जग-जननी कहलाउँगी...


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2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-05-2015) को "सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं" (चर्चा अंक-1963) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    श्रमिक दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
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