30 जुलाई 2014

मेरा सूरज है या चाँद कहूँ...






ऐ ज़िन्दगी! तुझे क्या कहूँ,
          मेरा सूरज है या चाँद कहूँ.....

सूरज की तपिश है तुझमें तो,
          चन्दा सी शीतलता भी है।
इनसे है जगमग दुनिया तो,
          मेरे दिल की रौनक तुझसे है।
मेरा सूरज है और चाँद भी तू,
          ऐ दिल बता तुझे क्या कहूँ.....

सूरज सा दमकता चेहरा है,
          चन्दा सी कोमल काया है।
दिल के अन्तस को जो छू ले,
          ऐसा अमृत-जल छलकाया है।
तू सब कुछ है, मेरा सब कुछ है,
          दिल ये कहे, मैं क्या करूँ.....

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4 टिप्‍पणियां:

  1. शब्द-शब्द बोल रहे।
    बहुत उम्दा अभिव्यक्ति।
    नई रचना : सूनी वादियाँ

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  2. जिंदगी है तो सब कुछ है ...

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  3. तू सब कुछ है ......... अनुपम भाव संयोजन ....बेहतरीन

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