10 जून 2012

पुनर्जन्म...!




आज हुआ पुनर्जन्म मेरा
जीती थी अब तक बिन सांसों के
बिन जाने खुद को, बिन पहचाने
कोई साथी भी ना था मेरा
ना ही मैं किसी की सखा थी
साथ थे तुम मेरे, मेरे आत्मविश्वास
   पर तुम्हें कभी पहचाना ना था...
बहुत कुछ था अन्दर छुपा हुआ मेरे
पर कभी उसको जान ना पाई मैं
आज खुद से मेरा परिचय हुआ
   बहुत दिनों बाद आज मैंने खुद को पाया है...
आज यूँ उड़ रही हूँ मैं
जैसे पा लिया सारा आकाश
   मेरी बाँहों में है धरा विशाल...
आज हर फूल, हर कली मेरे साथ है
ये मंद पवन मेरी संगिनी बन झूम रही है
यूँ लग रहा है जैसे
   हर परिंदा मेरे लिए ही गा रहा है...
दिल बार-2 कह रहा है कि
हर किसी को बता दूँ
   कि मैं आज कितनी खुश हूँ...
आज अपना एक पल खुद को दिया
एक लम्हा खुद को जिया
तब अपने होने का अहसास हुआ
कुछ पा लेने का विश्वास हुआ
यूँ लगा कि बहुत कुछ कर सकती हूँ मैं
इस दुनियाँ को भी बदल सकती हूँ मैं
आज के बाद इन आँखों में कभी आंसू ना होगा
होंगे केवल सपने, जिन्हें पूरा करुँगी मैं
क्योंकि आज मैंने जान लिया है कि
       मैं क्या हूँ.....!!

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बेहतरीन लिखा है....

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  2. खुद को जानने का हौसला आत्मविश्वास में परिणत होकर इतिहास रच देता है ...

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  3. बहुत ही स्ंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

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