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29 जनवरी 2014

गज़ल






जो दर्द तूने दबा रखा कब से सीने में।
खुदा करे कि मेरी आँख से निकल जाए॥१॥

वो हँसी जो न खिल सकी है मेरे चेहरे पे।
मेरी चाहत से तेरे लब पे वो बिखर जाए॥२॥

जिन सवालों पे ये जमाना हँसा करता है।
उन सवालों का हर जवाब तू ही बन जाए॥३॥

वो इश्क जिसको सहेजा है तूने पलकों में।
तेरी नज़रों से मेरे दिल में वो उतर जाए॥४॥

वो वफ़ा, जिसपे जमाना ये नाज़ करता है।
तुझे सँवार दे, मेरा नसीब बन जाए॥५॥

        
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15 मई 2012

तेरे प्यार के साये में...



बेदर्द इस जहाँ में, यूँ तेरा मुझसे मिलना
करके वफ़ा का वादा, दिल प्यार से भर देना...

यूँ लगता है जैसे तुम, मेरा ही हो फ़साना
दिल में बसाया है तो, कभी दिल से न भुलाना...

पल भर को मुझसे हटकर, यूँ तेरा दूर जाना
महसूस करती हूँ मैं, सांसों का थम ही जाना...

तेरे प्यार के साए में, महसूस ये होता है
सारे जहाँ की खुशियाँ, मेरे अंजुमन में आना...