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26 फ़रवरी 2015

सोहर / जच्चा (लोक-गीत)




हमरे तो पीर आवे, ननदी हँसत डोले-२

प्यारे सैंया, भोले सैंया
ननदी विदा करो
आज विदा करो, अभी विदा करो
हमरे तो पीर आवे...

साड़ी कढ़न गई, ब्लाउज सिलन गयो
गंगा-जमुना चढ़ रही हैं
कैसे विदा करूँ..
लेने कोई आया नहीं है
कैसे विदा करूँ..
हमरे तो...

साड़ी मैं अपनी दूँगी, ब्लाउज तो रानी का है
गंगा-जमुना नाव डला दो
ऐसे विदा करो..
छोटा देवर संग करूँगी
ऐसे विदा करो..
हमरे तो...


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25 मार्च 2014

सोहर / जच्चा (लोक-गीत)






सौंठ के लड्डू चरपरे हैं...

इक लड्डू मेरी सासुल ने माँगा..
बहू जरा दीजो, कस बने हैं..
आधा देत मोरी अँगुरी दु:खत हैं..
पूरो दियो ना जाए-
गरी के गोला नौ पड़े हैं..
पसेरिन इनमें घी भरो है..
छुआरे-मेवा सब पड़े हैं..
सौंठ के लड्डू चरपरे हैं.....॥१॥

इक लड्डू मेरी जिठनी ने माँगा..
छोटी जरा दीजो, कस बने हैं..
आधा देत मोरी अँगुरी दु:खत हैं..
पूरो दियो ना जाए-
गरी के गोला नौ पड़े हैं..
पसेरिन इनमें घी भरो है..
छुआरे-मेवा सब पड़े हैं..
सौंठ के लड्डू चरपरे हैं.....॥२॥

इक लड्डू मेरी ननदी ने माँगा..
भाभी जरा दीजो, कस बने हैं..
आधा देत मोरी अँगुरी दु:खत हैं..
पूरो दियो ना जाए-
गरी के गोला नौ पड़े हैं..
पसेरिन इनमें घी भरो है..
छुआरे-मेवा सब पड़े हैं..
सौंठ के लड्डू चरपरे हैं.....॥३॥

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