Sher लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Sher लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

26 मई 2015

नेमतों के गुलदस्ते...!




फ़िर से बख्शे हैं तूने नेमतों के गुलदस्ते
फ़िर से उट्ठे हैं मेरे हाथ दुआओं के लिए॥१॥

फ़िर से महके हैं किसी नज़्म के हँसी दस्ते
फ़िर से आया है कोई, बज़्म में अल्फ़ाज़ लिए॥२॥

फ़िर से दी है तूने आवाज मेरे सैदाई
फ़िर से आए हैं, फ़ना होने को जज़्बात लिए॥३॥

फ़िर चमक उट्ठा है आकाश किसी लौ की तरह
फ़िर से टूटा है इक तारा तेरी सौगात लिए॥४॥

फ़िर से आया है अँधेरा मुझे डराने को
फ़िर से चमके हैं ये जुगनू तेरी कोई बात लिए॥५॥

               ********


9 जून 2014

( कुछ शे’र )






ख़ुदा मेरे अता कर दे, तू मुझको बस नज़र इतनी।
कि हर वो शख़्श, जो देखूँ मैं, तो बस तू नज़र आए॥१॥

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

मुझे अब सीखना होगा, हुनर सबसे छुपाने का।
कि हर इक लम्हा, यहाँ दिल में, किसी की याद रहती है॥२॥

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

तुझे देखूँ, न देखूँ तो, किधर देखूँ बता यारम।
कि हर इक शख़्स में, मुझको तो बस तू ही नज़र आए॥३॥

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

यहाँ किसको कहें अपना, ये दिल में टीस उठती है।
जरूरत पड़ने पर हर शख़्स, नज़रें फ़ेर लेता है॥४॥

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

छुपा लो दोस्तों खंजर, नहीं अब नफ़रतें दिल में।
यहाँ की हर गली अब प्रेम से आबाद रहती है॥५॥

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

परखना तुम, किसी कातिल को कभी, यूँ भी देखकर।
छुपा खंजर, किसे देखेगा, वो कुछ मुस्कुरा कर के॥६॥

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

न जाने कब उतर आए, लहू उन पाक नज़रों में।
मैं अक्सर कांप जाती हूँ, यहाँ की आवो-हवा में॥७॥



              **********