21 मई 2012

कुछ शब्द जिन्हें जी लिया मैनें...




कुछ शब्द जिन्हें जी लिया मैनें
जो कहे गए थे मुझसे
कभी प्यार से दुलार कर
     कभी अपने गले से लगाकर.....
कुछ शब्दों के रूप में
कभी किसी ने कर के मुझ पर विश्वास
मेरे कंधे पे रख के अपना सिर
     बहा दिया अपना दर्द मेरे सीने पर.....
कुछ शब्द ऐसे जो आईना बनकर सामने आये
दिया मुझे विश्वास
     आत्म-द्रढ़ता से खड़े होने का.....
कुछ शब्दों ने
तोड़ दिया दिल का बांध
प्यार उमड़ पडा आंसुओं के रूप में
जब मेरी बेटी ने एक दिन कहा
     माँ 'तुम सिर्फ मेरी हो'.....
ये शब्द ही तो हैं
जिन्हें हम जीते हैं
कभी ख़ुशी के रूप में
कभी दर्द के साथ
और कभी आंसू बनकर
     वो हमें गले लगा लेते हैं.....

2 टिप्‍पणियां:

  1. शब्दों में बड़ी ताकत होती है, और जो शब्द प्यार से कहे गए हों उनकी शक्ति तो कई गुणा अधिक हो जाती है।

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  2. माँ बेटी का भावमय स्नेहिल रिश्ता और प्रेम ..भावनाओं का बाँध टूटना ही था !

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